रविवार, 21 अप्रैल 2013


   एकजुटता! शिक्षा! धनाढ्यता! आमन्त्रण मुल्य  मात्र  100 रूपया 

विचार स्वयं उत्पन्न नहीं होते. परिस्थितिया विचारों का निर्माण करती है.मगर जब उन्ही परिस्थितियों में भरपूर खामिया हो तो नवीन प्रयोगों कीउत्पत्ति होती है. संभवत इसलिए कि व्याप्त खामियों को अनभिग करते हुऐ कुछ सकारात्मक उत्थान कर सके.लक्ष्य कठिन हो सकते है लेकिन परिस्थितियों द्वारा उत्पन्न विचारों के आधार पर हम मिलकर बखूबी उनका निर्धारण कर सकते है. हमारे समाज में अभी सबसे महत्वपूरण खामी चन्दा प्रथा है. चंदे से प्राप्त राशि पर किसी एक व्यक्ति अथवा संगठन का एकाधिकार होता है. जो उसे अपनी इच्छा मुताबिक उपयोग में लाता है. चन्दा प्रदान करने वाले को यह कभी पता नहीं चलता कि उसके द्वारा दी गई राशि उचित उदेश्य पर व्यय की गई अथवा उसका दुरूपयोग हुआ.इससे होता यह है की चन्दा प्रथा पर सवालिया निशान खड़े हो जाते है. चन्दा प्रथा के परिपेक्ष्य में " २किलो आटा और २० रु" का विचार कही अधिक कारगर हो सकता है. मगर जब बात अशिक्षा, एकजुटता और दरिद्रता की आती है तो पुन एक नवीन प्रयोग की तलाश होती है. एक ऐसा प्रयोग जो परिस्थितियों केअनुरूप शशक्त भूमिका को वहन  कर सके.इसके लिए एक सरल सा  उपाय स्वीक्रत किया जा सकता है.


                निषाद विकास फंड 

          १. समाज के कुछ विश्वसनीय व्यक्तियों को मिलकर एक ऐसे कोष की स्थापना करनी चाहिए जिसमे समाज का समर्द्ध, व्यापारिक और नौकरीपेशा तबका अपनी इच्छानुरूपकुछ राशि समाज हित में दान करे.

२.दान की जाने वाली राशि न्यूनतम १०० रु एवं अधिकतम कितनी भी हो सकती है.

३.दान में प्राप्त राशि को एकमुश्त रूप में बेंक में रख दिया जाए.साथ ही यह भी ध्यान रखा जाए कि उस धन पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं रहे.

४. अलग- अलग  प्रान्तों के कुछ व्यक्तियों को उसका सदस्य बनाया जाए.

५. प्रतेयक माह की १५ तारिख को आय -व्यय का बयोरा समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जाए.

६. निषाद विकास फंड द्वारा किये जाने वाले कार्यो में पारदर्शिता लाने केलिए सभी सदस्य और समाज के बुद्दिजिव्यो के सुझावों का अनुपालन किया जाए.

७. सभी सदस्यों के पते, फोन नंबर सहित प्रकाशित किये जाए  

    

       निषाद विकास फंड कैसे काम करता है


  इस फंड के माधय्म से हम कुछ समस्याओ को आधार बनाकर कार्य कर सकते है.

१. शिक्षा = हमारे समाज में अशिक्षा का मुख्य कारण दरिद्रता है . इसके लिए सरल सा उपाय यह है कि जिन अभिभावकों के बच्चे धन की कमी की वजह से पढ़ नहीं पा रहे है, उन्हें कुछ प्रतिशत अथवा आर्थिक स्थिति के अनुरूप धन उपलब्ध कराया जाए.

२. कन्या विवाह = समाज में अधिकाँश लड़कियों का विवाह आर्थिक  हालात कमजोर होने के कारण नहीं हो पाता. उनकी शादियों का कुछ प्रतिशत अथवा परिस्थितियों के अनुसार पूरा खर्च वहन किया जाए.

३. बिमारी= हमारे समाज में आज भी बहुत से लोग समय से पूर्व धनाभाव के कारण अकाल म्रत्यु  को प्राप्त  हो जाते है. ऐसे व्यक्तियों को पूरण सहायताउपलब्ध कराई जाए.

४. निषाद पुरस्कार = समाज हित में कार्य करने वाले व्यक्तियों को पुरस्कर्त करके प्रोत्साहित किया जाए.

हम सभी बुद्दिजिव्यो और सम्मानित नेत्र्तव कर्ताओं को केवल ऐसे ही बिन्दुओ पर विचार करना होगा. यह चार बिंदु ही एकजुटता का सूत्रपात करते है. समाज के उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग की सहभागिता निचले तबके तक पहुच जाती है और निचलातबका आपसे यही चाहता है. वह  आपकी  वाक्पटुता पर विशवास नहीं कर रहा  है बल्कि आपकी कार्यशीलता को समझने के लिए व्याकुल है. इस तबके को मुख्य विचारधारा से जोड़ने के लिए आपको कार्यशीलता  की परीक्षा देनी ही पड़ेगी. अन्यथा कितने भी ढोल -ताशे और सेमीनार  कीजिये, नतीजा वाही धाक के तीन पात

रहेगा . जय समाज! जय निषाद !